कृष्ण जन्माष्टमी | कृष्ण लीला | lord krishna

कृष्ण जन्माष्टमी व कृष्ण लीला
द्वापर युग मे श्री कृष्ण जी का जन्म कंस की जेल में देवकी जी के गर्भ से हुआ। इस दिन को जन्माष्ठमी के रूप में मनाई जाती है।  बाल्यावस्था से ही कृष्ण जी ने लीलाएं की जो भगवत सुधा सागर में लिपिबद्ध की गई।

जब कृष्ण जी का जन्म हुआ तो कंस की जेल से के सारे दरवाजे खुल गए और वासुदेव जी ने गोकुल में नंद जी के घर छोड़कर यसोदा की नवजात कन्या को लेकर वापस जेल में आ गए।

कृष्ण जन्माष्टमी| Lord krishna | Lord kabir | कृष्ण लीला
कृष्ण-जन्माष्टमी
इंद्र के प्रकोप से गोकुल की रक्षा
श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर हम आपको बताते हैं कि कृष्ण जी ने इंद्र द्वारा भारी वर्षा के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को एक अंगुली से उठा लिए। इसी कारण से गोवर्धन पर्वत कि पूजा की जाने लगी। जन्माष्टमी भारत के सभी राज्यो में मनाई जाती है।

कृष्ण जी की प्रमुख लीलाएं मुख्यतः कालयवन नामक राक्षस को मारना, कंस के साथ साथ अनेक राक्षसों को वध, काली दह में भयंकर विष वाले सर्प  का वध, आदि है। कृष्ण जी अन्य चमत्कार की कर देते थे ,   कृष्ण जी जब बंसी बजाते थे तो आसपास के लोग बंसी की मधुर आवाज को सुनकर उनके पास आ जाते थे।

कृष्ण जी में विद्यमान  शक्ति
कृष्ण जी श्री विष्णु जी के अवतार थे। विष्णु जी 16 कला व 4 भुजा युक्त है तथा उनके अवतार भी 16 कला युक्त है वे  4 भुजा तक रख सकते हैं।
वेसे ही ब्रह्मा जी, व शिव जी भगवान भी 16 कला व 4 भुजा युक्त है। तीनो देवताओ में समान शक्ति है।
कृष्ण-जन्माष्टमी

कबीर साहेब जी की लीलाएं
कबीर साहेब जी सन 1398 में जेष्ठ मास की पूर्णिमा को ब्रह्म मुहूर्त में काशी के लहरतारा तालाब में सशरीर प्रकट हुए।


जन्म से ही उन्होंने अनेक लीलाएं की जैसे, कमल के फूल पर सशरीर प्रकट होना, कुँआरी गाय का दूध से उनकी परवरिश होना, रामानन्द जी को सत्य ज्ञान बताकर सतलोक दिखाना, राजा सिकन्दर लोदी का जलन का रोग ठीक करना, कमाल ओर कमाली नामक लड़का लड़की जो कई दिन पहले मर चुके थे उन्हें जीवित करना, गोरखनाथ को ज्ञान गोष्ठी में हराना,  गर्म तेल की कड़ाही व कुवें में दबाने पर भी नही मरना, आदि लीलाएं की।

कबीर साहेब जी एक बार यमुना नदी के किनारे बंशी बजाए थे तो सभी जीव जंतु उनकी मधुर आवाज को सुनकर रुक गए यमुना नदी का नीर भी एक जगह रुक गया।

कबीर साहेब जी सशरीर जाना
लीला स्वरूप कबीर साहेब जी मगहर से सशरीर वापस अपने निजी लोक सतलोक में लाखो लोगो के सामने गए। उनके सरीर की जगह सुगन्दीत फूल मिले जिसे हिन्दू व मुस्लिम समुदाय के लोग आधे आधे ले गए।

कृष्ण जी के जन्म दिवस पर जन्माष्ठमी जयंती के रूप में मनाते हैं जबकि कबीर साहेब जी धरती पर आए थे उस उपलक्ष में प्रकट दिवस मानते हैं। तथा कबीर साहेब जी असंख्य कला युक्त है , असंख्य हाथ तक रख सकते हैं।
 कृष्ण जी अनेक राक्षसों का  वध किया लेकिन कबीर साहेब जी ने 64 लाख  व्यक्तियों को जगह जगह प्रकट होकर सच्चा ज्ञान बताकर उनका उद्धार किया।
कृष्ण जी के 108 पत्नियां थी तथा 16 हज़ार अन्य पत्नियां थी।  अंत मे बाल्या नामक शिकारी के तीर मारने से उनकी मृत्यु हुई।

कबीर साहेब जी ने बताया है कि ,
मात पिता हमरे नाही न हमरे घर दासी (पत्नी)।
जुलाहे का सुत आन कहाया जगत करे मेरी हांसी।।


कबीर साहेब जी के माता व पिता नही थे वे नीरू व नीमा नामक निसन्तान दम्पति को मिले थे। नीमा के गर्भ से उनका जन्म नही हुआ तथा कबीर साहेब जी के पत्नी भी नही थी।  कुछ लोग कहते हैं कि उनके पत्नी थी। तो यह सिर्प लोक वेद था जो केवल जनता व नकली ब्राह्मणों द्वारा भृम फैलाया गया।
तीन-लोक-के-भगवान-कृष्ण-जी-हैं-सर्वसृष्टि-कर्ता-कबीर-साहेब-जी-है

इससे सिद्ध हुआ कि कृष्ण जी तीन लोक के भगवान है। परमेश्वर नही।

तीनो देवता ब्रह्मा, विष्णु व शिव जी तीन गुण है
वास्तव में सर्वशक्तिमान परमेश्वर कबीर साहेब जी है। जिनका जन्म व मृत्यु नही हुई।


कबीर साहेब जी ने बताया कि तीनों देवता ही तीन गुण है। व


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